झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के पद पर भर्ती के लिए झारखंड न्यायिक सेवा परीक्षा आयोजित करता है। भर्ती प्रक्रिया में मुख्य रूप से तीन चरण होते हैं—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार (Viva-Voce)। झारखंड न्यायिक सेवा सिलेबस 2026 प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के लिए अलग-अलग है।
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प्रारंभिक परीक्षा के तहत दो पेपर होते हैं, जबकि मुख्य परीक्षा में 6 पेपर शामिल होते हैं। प्रारंभिक परीक्षा में सफल होने वाले उम्मीदवार झारखंड PCS-J मुख्य परीक्षा 2026 में शामिल होने के पात्र होते हैं। अंतिम मेरिट स्कोर में केवल मुख्य परीक्षा में प्राप्त अंकों को शामिल किया जाता है।
प्रारंभिक परीक्षा का आयोजन उम्मीदवारों को मुख्य परीक्षा के लिए शॉर्टलिस्ट करने के उद्देश्य से किया जाता है। प्रारंभिक परीक्षा में कुल 400 प्रश्न होते हैं, जिन्हें दो पेपरों में विभाजित किया गया है—सामान्य अध्ययन-I और सामान्य अध्ययन-II (झारखंड से संबंधित प्रश्न)। प्रत्येक प्रश्न 2 अंक का होता है।
मुख्य विषय | उप-विषय | प्रश्नों की संख्या |
भारत का इतिहास (15 प्रश्न) | प्राचीन भारत | 5 |
मध्यकालीन भारत | 5 | |
आधुनिक भारत | 5 | |
भारत का भूगोल (10 प्रश्न) | सामान्य भूगोल | 3 |
भौतिक भूगोल | 3 | |
आर्थिक भूगोल | 2 | |
सामाजिक एवं जनसांख्यिकीय भूगोल | 2 | |
भारतीय राजव्यवस्था एवं शासन (10 प्रश्न) | भारत का संविधान | 4 |
लोक प्रशासन एवं सुशासन | 4 | |
विकेंद्रीकरण: पंचायत एवं नगरपालिकाएं | 2 | |
आर्थिक एवं सतत विकास (10 प्रश्न) | भारतीय अर्थव्यवस्था की मूल विशेषताएं | 4 |
सतत विकास एवं आर्थिक मुद्दे | 4 | |
आर्थिक सुधार एवं वैश्वीकरण | 2 | |
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (15 प्रश्न) | सामान्य विज्ञान | 6 |
कृषि एवं प्रौद्योगिकी विकास | 6 | |
सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी | 3 | |
झारखंड से संबंधित प्रश्न (10 प्रश्न) | झारखंड के इतिहास, समाज, संस्कृति एवं विरासत की सामान्य जानकारी | 10 |
राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय समसामयिक घटनाक्रम (15 प्रश्न) | राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय समसामयिक घटनाक्रम | 15 |
विविध प्रकृति के सामान्य प्रश्न (15 प्रश्न) | मानवाधिकार; पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता एवं जलवायु परिवर्तन; शहरीकरण; खेल; आपदा प्रबंधन; गरीबी एवं बेरोजगारी; पुरस्कार; संयुक्त राष्ट्र एवं अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां | 15 |
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सामान्य अध्ययन-II में मुख्य रूप से झारखंड के इतिहास, संस्कृति, साहित्य, भूगोल, अर्थव्यवस्था, प्रशासन, कानून, पर्यावरण, खेल, सरकारी योजनाओं और समसामयिक घटनाक्रम से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं।
मुख्य विषय | उप-विषय | प्रश्नों की संख्या |
झारखंड का इतिहास | मुंडा शासन व्यवस्था | 1 |
नागवंशी शासन व्यवस्था | 1 | |
पड़हा पंचायत शासन व्यवस्था | 1 | |
मांझी परगना शासन व्यवस्था | 1 | |
मुंडा-मानकी शासन व्यवस्था | 1 | |
ढोकलो सोहोर शासन व्यवस्था | 1 | |
जाति पंचायत शासन व्यवस्था | 2 | |
झारखंड आंदोलन | झारखंड के सदान समुदाय | 1 |
झारखंड के जनजातीय समुदाय | 1 | |
झारखंड के स्वतंत्रता सेनानी | 1 | |
झारखंड की प्रमुख हस्तियां | 2 | |
झारखंड आंदोलन एवं राज्य गठन | 2 | |
झारखंड की विशिष्ट पहचान | झारखंड की सामाजिक परिस्थितियां | 1 |
झारखंड की सांस्कृतिक परिस्थितियां | 1 | |
झारखंड की राजनीतिक परिस्थितियां | 1 | |
झारखंड की आर्थिक परिस्थितियां | 1 | |
झारखंड की धार्मिक विशेषताएं एवं पहचान | 1 | |
झारखंड का लोक साहित्य, नृत्य, संगीत, वाद्य यंत्र, पर्यटन स्थल एवं जनजातीय संस्कृति | लोक साहित्य | 1 |
पारंपरिक कला एवं लोक नृत्य | 1 | |
लोक संगीत एवं संगीत वाद्य यंत्र | 1 | |
पर्यटन स्थल: प्राकृतिक, पुरातात्विक, ऐतिहासिक, धार्मिक एवं आधुनिक स्थल | 1 | |
जनजातियां, जातीय समूह एवं उनकी विशेषताएं | 1 | |
झारखंडी साहित्य एवं साहित्यिक व्यक्तित्व | झारखंडी साहित्य एवं साहित्यिक व्यक्तित्व | 5 |
झारखंड के प्रमुख शैक्षणिक संस्थान | प्रमुख शैक्षणिक संस्थान | 3 |
झारखंड में खेल | झारखंड के खेल एवं प्रतियोगिताएं | 5 |
झारखंड से संबंधित भूमि कानून/अधिनियम | छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT) | 5 |
संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम (SPT) | 5 | |
अन्य राज्य-विशिष्ट अधिनियम | 2 | |
आर्थिक विकास एवं झारखंड का भूगोल | 1947 के बाद राज्य में आर्थिक विकास का इतिहास; झारखंड का भूगोल, जिसमें वन, नदियां, पहाड़ियां, पर्वत, खदानें एवं खनिज शामिल हैं | 10 |
औद्योगिक नीति, विस्थापन एवं पुनर्वास नीति तथा अन्य नीतियां | झारखंड की औद्योगिक नीति, विस्थापन एवं पुनर्वास नीति तथा अन्य नीतियां | 6 |
प्रमुख उद्योग एवं औद्योगिक विकास | झारखंड के प्रमुख उद्योगों के नाम एवं स्थान तथा औद्योगिक विकास | 5 |
प्रमुख योजनाएं एवं उप-योजनाएं | झारखंड की प्रमुख सरकारी योजनाएं एवं उप-योजनाएं | 5 |
झारखंड में वन प्रबंधन एवं वन्यजीव संरक्षण | वन प्रबंधन एवं वन्यजीव संरक्षण | 5 |
झारखंड में पर्यावरणीय मुद्दे | पर्यावरण संबंधी तथ्य, पर्यावरणीय परिवर्तन तथा शमन एवं अनुकूलन से संबंधित मुद्दे | 7 |
झारखंड में आपदा प्रबंधन | आपदा प्रबंधन | 5 |
झारखंड से संबंधित विविध तथ्य एवं समसामयिक घटनाक्रम | झारखंड से संबंधित विविध तथ्य एवं समसामयिक घटनाक्रम | 7 |
झारखंड न्यायिक सेवा मुख्य परीक्षा में 6 पेपर होते हैं। पहला पेपर सामान्य हिंदी एवं सामान्य अंग्रेजी का होता है। यह 100 अंकों का क्वालिफाइंग पेपर है। उम्मीदवारों को इसमें कम से कम 30 अंक प्राप्त करना आवश्यक है। इस पेपर में प्राप्त अंकों को अंतिम मेरिट सूची में शामिल नहीं किया जाता है।
झारखंड न्यायपालिका मुख्य परीक्षा सिलेबस 2026: पेपर 1
विषय | टॉपिक | अंक |
सामान्य हिंदी (50 अंक) | निबंध (400 शब्द) | 15 |
व्याकरण | 15 | |
वाक्य संरचना | 10 | |
संक्षेपण लेखन (Precis Writing) | 10 | |
सामान्य अंग्रेजी (50 अंक) | निबंध (400 शब्द) | 15 |
व्याकरण | 15 | |
बोधगम्यता (Comprehension) | 10 | |
संक्षेपण लेखन (Précis Writing) | 10 |
झारखंड न्यायपालिका मुख्य परीक्षा का दूसरा पेपर भाषा एवं साहित्य का होता है। यह पेपर 150 अंकों का है और इसके अंक अंतिम मेरिट सूची तैयार करने में शामिल किए जाते हैं। उम्मीदवारों को नीचे दी गई सूची में से किसी एक भाषा का चयन करना होता है।
उड़िया भाषा एवं साहित्य
बांग्ला भाषा एवं साहित्य
उर्दू भाषा एवं साहित्य
संस्कृत भाषा एवं साहित्य
अंग्रेजी भाषा एवं साहित्य
हिंदी भाषा एवं साहित्य
संथाली भाषा एवं साहित्य
पंचपरगनिया भाषा एवं साहित्य
नागपुरी भाषा एवं साहित्य
मुंडारी भाषा एवं साहित्य
कुड़ुख भाषा एवं साहित्य
कुड़माली भाषा एवं साहित्य
खोरठा भाषा एवं साहित्य
खड़िया भाषा एवं साहित्य
हो भाषा एवं साहित्य
चयनित भाषा के विस्तृत सिलेबस की जानकारी संबंधित आधिकारिक सिलेबस में दी गई है।
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झारखंड PCS-J 2026 मुख्य परीक्षा का तीसरा पेपर सामाजिक विज्ञान का है। इसमें दो मुख्य भाग शामिल हैं—इतिहास और भूगोल। पेपर के प्रत्येक भाग के लिए 100-100 अंक निर्धारित हैं। दोनों भागों में वैकल्पिक प्रश्न होंगे। पेपर में लगभग 40% प्रश्न झारखंड राज्य से संबंधित होंगे।
काल/खंड | शामिल विषय |
प्राचीन काल | सिंधु घाटी सभ्यता; आर्यों की उत्पत्ति, प्राचीनता एवं विशेषताएं; वैदिक साहित्य; ऋग्वैदिक काल का समाज, अर्थव्यवस्था एवं धर्म; लिच्छवियों एवं उनकी गणतांत्रिक व्यवस्था; मगध साम्राज्य का उदय; मौर्य एवं अशोक; कलिंग युद्ध एवं धम्म; मौर्य कला एवं वास्तुकला; कुषाण एवं कनिष्क; गुप्त साम्राज्य; हर्षवर्धन; चोल; पल्लव एवं उनकी सांस्कृतिक उपलब्धियां |
मध्यकाल | अरब एवं गजनवी आक्रमण; दिल्ली सल्तनत; अलाउद्दीन खिलजी के बाजार एवं सैन्य सुधार; मुहम्मद-बिन-तुगलक की नीतियां; मंगोल आक्रमण; सूफीवाद एवं भक्ति आंदोलन; भारत-इस्लामी वास्तुकला; उर्दू एवं हिंदी का विकास; मुगल साम्राज्य; शेरशाह सूरी; अकबर की धार्मिक एवं राजपूत नीतियां; जागीरदारी एवं मनसबदारी व्यवस्था; मुगल वास्तुकला एवं चित्रकला; आर्थिक स्थिति; औरंगजेब; मराठों का उदय एवं विस्तार; शिवाजी और मराठों का पतन |
आधुनिक काल | यूरोपीय बस्तियां एवं ईस्ट इंडिया कंपनी; ब्रिटिश विस्तार; प्लासी एवं बक्सर के युद्ध; मैसूर; सहायक संधि; विलय का सिद्धांत एवं व्यपगत का सिद्धांत; किसान एवं जनजातीय प्रतिरोध; 1857 का विद्रोह; हिंदू एवं मुस्लिम सामाजिक सुधार आंदोलन; महिलाओं की स्थिति एवं सुधार; ब्रिटिश भू-राजस्व व्यवस्थाएं; राष्ट्रवाद का उदय; भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस; नरमपंथी एवं गरमपंथी; स्वदेशी आंदोलन; होम रूल लीग; खिलाफत आंदोलन; महात्मा गांधी एवं जन आंदोलनों; असहयोग आंदोलन; सविनय अवज्ञा आंदोलन; भारत छोड़ो आंदोलन; विभाजन एवं उसके परिणाम; स्वतंत्रता के बाद भारत; रियासतों का एकीकरण; भाषाई पुनर्गठन; गुटनिरपेक्ष नीति; बांग्लादेश मुक्ति |
झारखंड का इतिहास | आदि-धर्म/सरना पंथ; सदान एवं नागपुरिया भाषा का उद्भव; जनजातीय विद्रोह एवं राष्ट्रवादी संघर्ष; बिरसा आंदोलन; टाना भगत आंदोलन; झारखंड में स्वतंत्रता आंदोलन |
खंड | शामिल विषय |
भौतिक भूगोल (सामान्य सिद्धांत) | पृथ्वी की उत्पत्ति एवं विकास; पृथ्वी की आंतरिक संरचना; वेगनर का महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत; प्लेट विवर्तनिकी; ज्वालामुखी, भूकंप एवं सुनामी; प्रमुख चट्टानों के प्रकार एवं उनकी विशेषताएं; नदी, हिमानी, शुष्क एवं कार्स्ट क्षेत्रों की स्थलाकृतियां; अपक्षय, बृहद क्षरण, अपरदन एवं निक्षेपण जैसी भू-आकृतिक प्रक्रियाएं; मृदा निर्माण; भू-दृश्य चक्र; डेविस एवं पेंक के सिद्धांत; वायुमंडल की संरचना एवं संगठन; सूर्यातप एवं पृथ्वी का ऊष्मा बजट; तापमान का वितरण एवं तापमान व्युत्क्रमण; वायुराशियां एवं वाताग्र; उष्णकटिबंधीय एवं शीतोष्ण चक्रवात; वाष्पीकरण एवं संघनन; ओस, पाला, कोहरा, धुंध एवं बादल; वर्षा के प्रकार; कोपेन एवं थॉर्नथवेट द्वारा जलवायु का वर्गीकरण; ग्रीनहाउस प्रभाव एवं वैश्विक जलवायु परिवर्तन; जल चक्र; समुद्री तापमान एवं लवणता; लहरें, ज्वार-भाटा एवं धाराएं; महासागरीय तल की स्थलाकृति |
भारत का भौतिक एवं मानव भूगोल | भारत की संरचना, उच्चावच एवं भौतिक विभाजन; हिमालयी एवं प्रायद्वीपीय अपवाह तंत्र; भारतीय मानसून, जिसमें इसकी प्रक्रिया, आगमन एवं वापसी शामिल है; कोपेन एवं ट्रिवार्था के अनुसार जलवायु के प्रकार; हरित क्रांति एवं उसका प्रभाव; प्रमुख फसलें एवं खाद्य संकट; प्राकृतिक वनस्पति एवं वन के प्रकार; वन्यजीव संरक्षण एवं जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र; ICAR वर्गीकरण के अनुसार प्रमुख मृदा प्रकार; मृदा क्षरण एवं संरक्षण; बाढ़, सूखा, चक्रवात एवं भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाएं; जनसंख्या वृद्धि, वितरण एवं घनत्व; आयु-लिंग अनुपात तथा ग्रामीण-शहरी संरचना; जनसंख्या, पर्यावरण एवं विकास; ग्रामीण एवं शहरी बस्तियां; नगरीय आकारिकी एवं कार्यात्मक वर्गीकरण; मानव बस्तियों की समस्याएं |
भारत के प्राकृतिक संसाधन: विकास एवं उपयोग | भूमि संसाधन एवं भूमि उपयोग के प्रतिरूप; चावल, गेहूं, कपास, जूट, गन्ना, रबर, चाय एवं कॉफी जैसी प्रमुख फसलों के लिए कृषि भूमि उपयोग एवं भौगोलिक परिस्थितियां; जल संसाधन, सिंचाई एवं औद्योगिक उपयोग; जल संकट एवं संरक्षण; वर्षा जल संचयन, जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन एवं भूजल प्रबंधन; लौह अयस्क, तांबा, बॉक्साइट एवं मैंगनीज जैसे धात्विक खनिज; गैर-धात्विक एवं पारंपरिक ऊर्जा संसाधन, जिनमें कोयला, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस शामिल हैं; जलविद्युत एवं सौर, पवन तथा बायोगैस जैसे गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोत; ऊर्जा संसाधनों का वितरण एवं संरक्षण |
उद्योग, परिवहन एवं व्यापार | उद्योगों के प्रकार; औद्योगिक अवस्थिति को प्रभावित करने वाले कारक; लौह-इस्पात, सूती वस्त्र, चीनी एवं पेट्रोकेमिकल उद्योगों का वितरण एवं बदलते प्रतिरूप; औद्योगिक अवस्थिति का वेबर सिद्धांत एवं इसकी आधुनिक प्रासंगिकता; सड़क, रेलवे एवं जलमार्ग; अंतरराष्ट्रीय व्यापार के आधार; भारत के विदेशी व्यापार के बदलते प्रतिरूप |
झारखंड का भूगोल एवं संसाधनों का उपयोग | भूवैज्ञानिक इतिहास, स्थलाकृतियां, अपवाह, जलवायु, मृदा के प्रकार एवं वन; कृषि एवं सिंचाई; दामोदर एवं स्वर्णरेखा घाटी परियोजनाएं; झारखंड के खनिज संसाधन, उनका निष्कर्षण एवं उपयोग; जनसंख्या वृद्धि, वितरण एवं घनत्व; जनजातीय जनसंख्या एवं उसका वितरण; जनजातीय समुदायों की समस्याएं एवं जनजातीय विकास योजनाएं; रीति-रिवाज, परंपराएं एवं त्योहार; औद्योगिक एवं शहरी विकास; लौह, इस्पात एवं सीमेंट सहित प्रमुख उद्योग; कुटीर उद्योग; शहरी बस्तियों के प्रतिरूप एवं प्रदूषण संबंधी समस्याएं |
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झारखंड पीसीएस-जे (PCS-J) मुख्य परीक्षा का चौथा पेपर भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था, लोक प्रशासन एवं सुशासन है। यह पेपर दो खंडों में विभाजित है—भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था तथा लोक प्रशासन एवं सुशासन। प्रत्येक खंड 100 अंकों का है।
खंड | शामिल विषय |
भारतीय संविधान: परिचय एवं विशेषताएं | भारतीय संविधान की प्रस्तावना; धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक और समाजवादी शब्दों के पीछे की संवैधानिक विचारधारा; संविधान की संरचना एवं प्रमुख विशेषताएं; मूल संरचना सिद्धांत (Basic Structure Doctrine); जनहित याचिका (Public Interest Litigation) की अवधारणा |
मौलिक अधिकार एवं कर्तव्य | मौलिक अधिकार; मौलिक कर्तव्य; राज्य के नीति निदेशक तत्व |
केंद्र सरकार – कार्यपालिका | राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद की शक्तियां एवं कार्य; गठबंधन सरकार के अंतर्गत केंद्रीय कार्यपालिका का कामकाज |
केंद्र सरकार – विधायिका | लोकसभा एवं राज्यसभा; संगठन एवं कार्य; कानून बनाने की प्रक्रिया; संसदीय समितियां; कार्यपालिका पर संसद का नियंत्रण; संसद एवं उसके सदस्यों के विशेषाधिकार एवं उन्मुक्तियां |
केंद्रीय न्यायपालिका | सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका एवं शक्तियां; प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत एवं विधि का शासन (Rule of Law); न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review); न्यायिक सक्रियता (Judicial Activism) |
राज्य सरकार – कार्यपालिका | राज्यपाल, मुख्यमंत्री एवं मंत्रिपरिषद की शक्तियां एवं कार्य |
राज्य सरकार – विधायिका | राज्य विधानमंडलों का संगठन, शक्तियां एवं कार्य, विशेष रूप से झारखंड के संदर्भ में |
राज्य न्यायपालिका | उच्च न्यायालय का संगठन, शक्तियां एवं कार्य; अधीनस्थ न्यायपालिका |
स्थानीय शासन | पंचायत एवं नगरपालिकाएं; उनका गठन, शक्तियां, कार्य एवं जिम्मेदारियां; 73वां एवं 74वां संविधान संशोधन |
केंद्र-राज्य संबंध | केंद्र एवं राज्यों के बीच प्रशासनिक, विधायी एवं वित्तीय संबंध |
अनुसूचित एवं जनजातीय क्षेत्र | अनुसूचित क्षेत्रों एवं अनुसूचित जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन से संबंधित संवैधानिक प्रावधान |
आरक्षण संबंधी प्रावधान | विधानमंडलों एवं सेवाओं में अनुसूचित जाति (SC) एवं अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए सीटों के आरक्षण से संबंधित विशेष प्रावधान |
आपातकालीन प्रावधान | आपातकाल से संबंधित संवैधानिक प्रावधान |
संवैधानिक निकाय | भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG); भारत निर्वाचन आयोग |
राजनीतिक व्यवस्था | राजनीतिक दल एवं दबाव समूह |
झारखंड न्यायपालिका लोक प्रशासन एवं सुशासन सिलेबस 2026
खंड | शामिल विषय |
लोक प्रशासन: परिचय | लोक प्रशासन का अर्थ, क्षेत्र एवं महत्व; लोक प्रशासन एवं निजी प्रशासन |
केंद्रीय प्रशासन | केंद्रीय सचिवालय; मंत्रिमंडल सचिवालय; प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO); योजना आयोग; वित्त आयोग |
राज्य प्रशासन | राज्य सचिवालय; मुख्य सचिव; मुख्यमंत्री कार्यालय |
जिला प्रशासन | जिला मजिस्ट्रेट एवं कलेक्टर के पद की उत्पत्ति एवं विकास; जिला कलेक्टर की बदलती भूमिका; न्यायपालिका के पृथक्करण का जिला प्रशासन पर प्रभाव |
कार्मिक प्रशासन | सिविल सेवाओं में भर्ती; संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) एवं राज्य लोक सेवा आयोग; सिविल सेवकों का प्रशिक्षण; नेतृत्व एवं उसके गुण; कर्मचारियों का मनोबल एवं उत्पादकता |
प्रशासनिक प्राधिकरण | प्राधिकार का प्रत्यायोजन, केंद्रीकरण एवं विकेंद्रीकरण |
नौकरशाही | नौकरशाही की उत्पत्ति, गुण एवं दोष; नीति निर्माण एवं क्रियान्वयन में नौकरशाही की भूमिका; नौकरशाही एवं राजनीतिक कार्यपालिका के बीच संबंध; सामान्यज्ञ (Generalist) बनाम विशेषज्ञ (Specialist) |
विकास प्रशासन | विकास प्रशासन की अवधारणा एवं भूमिका |
आपदा प्रबंधन | आपदाओं के कारण, अर्थ एवं वर्गीकरण; आपदा शमन; तत्काल एवं दीर्घकालिक उपाय |
सुशासन | सुशासन एवं उत्तरदायी शासन का अर्थ एवं अवधारणा; जवाबदेही, पारदर्शिता, ईमानदारी एवं त्वरित सेवा वितरण; नागरिक समाज एवं जनभागीदारी की भूमिका |
शिकायत निवारण एवं नागरिक अधिकार | लोकपाल; लोकायुक्त; केंद्रीय सतर्कता आयुक्त; नागरिक चार्टर; सेवा का अधिकार अधिनियम; सूचना का अधिकार अधिनियम; शिक्षा का अधिकार अधिनियम; उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम; महिलाओं को घरेलू हिंसा से संरक्षण (रोकथाम) अधिनियम; वृद्धावस्था से संबंधित अधिनियम |
मानवाधिकार | मानवाधिकार की अवधारणा एवं अर्थ; मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा (UDHR); राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग; राज्य मानवाधिकार आयोग; मानवाधिकार एवं सामाजिक मुद्दे; मानवाधिकार एवं आतंकवाद |
झारखंड पीसीएस-जे (PCS-J) 2026 परीक्षा का पांचवां पेपर भारतीय अर्थव्यवस्था, वैश्वीकरण एवं सतत विकास है। इस पेपर को पांच खंडों में बांटा गया है। खंड 1 सभी अभ्यर्थियों के लिए अनिवार्य होगा और इसमें 2 अंकों के 20 वस्तुनिष्ठ प्रकार के प्रश्न होंगे, यानी कुल 40 अंक। अन्य खंडों में वैकल्पिक प्रश्न होंगे। झारखंड न्यायपालिका 2026 के इस पेपर का सिलेबस मुख्य रूप से चार भागों में विभाजित है।
विषय | सिलेबस |
राष्ट्रीय आय | GDP, GNP, NDP, NNP, GSDP, NSDP और DDP की अवधारणा एवं गणना; चालू एवं स्थिर कीमतें; कारक लागत |
मुद्रास्फीति | मुद्रास्फीति का अर्थ एवं इसे नियंत्रित करने के उपाय—मौद्रिक, राजकोषीय एवं प्रत्यक्ष उपाय |
जनसांख्यिकीय विशेषताएं | कार्यबल की संरचना, जनसांख्यिकीय लाभांश, जनगणना 2011 एवं राष्ट्रीय जनसंख्या नीति |
कृषि एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था | कृषि का महत्व; कृषि विकास, उत्पादन एवं उत्पादकता; कम उत्पादकता के कारण; सरकारी उपाय; हरित क्रांति एवं इंद्रधनुषी क्रांति; WTO एवं कृषि; कृषि विपणन एवं मूल्य निर्धारण |
औद्योगिक अर्थव्यवस्था | औद्योगिक नीतियां, पहल एवं उनमें हुए बदलाव |
लोक वित्त | अर्थ, प्रकृति, महत्व एवं क्षेत्र; सार्वजनिक राजस्व; कराधान के सिद्धांत एवं प्रकार; प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष, प्रगतिशील एवं आनुपातिक कर; VAT |
सार्वजनिक व्यय | सार्वजनिक व्यय में वृद्धि के सिद्धांत एवं कारण; अर्थव्यवस्था पर इसका प्रभाव; आंतरिक एवं बाह्य ऋण |
बजट | बजट निर्माण के सिद्धांत; प्रदर्शन आधारित एवं शून्य-आधारित बजट; FRBM |
राजकोषीय नीति | रोजगार, आर्थिक स्थिरता एवं विकास में राजकोषीय नीति की भूमिका |
केंद्र-राज्य वित्त | केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध; वित्त आयोग; 73वें एवं 74वें संविधान संशोधन के वित्तीय पहलू |
बैंकिंग एवं मौद्रिक प्रणाली | भारत की मौद्रिक एवं बैंकिंग प्रणाली की संरचना |
विदेशी व्यापार | भारत के व्यापार की संरचना एवं दिशा; भुगतान संतुलन से संबंधित समस्याएं |
ग्रुप (B) - सतत विकास, आर्थिक मुद्दे एवं भारतीय विकास रणनीति सिलेबस 2026
विषय | सिलेबस |
आर्थिक विकास | आर्थिक विकास का अर्थ एवं मापन; अल्पविकास की विशेषताएं |
विकास के सूचकांक | HDI, GDI एवं GEM; मानव विकास सूचकांक (HDI) में भारत की प्रगति |
विदेशी पूंजी एवं प्रौद्योगिकी | आर्थिक विकास में विदेशी पूंजी एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका |
सतत विकास | अवधारणा एवं सूचकांक; आर्थिक एवं पर्यावरणीय स्थिरता; ग्रीन GDP; भारत में सतत विकास के लिए रणनीतियां एवं नीतियां |
समावेशी विकास | समावेशी विकास का अर्थ; 11वीं एवं 12वीं पंचवर्षीय योजनाओं के दौरान विकास नीतियां एवं रणनीतियां |
वंचित वर्ग | अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), धार्मिक अल्पसंख्यकों, पिछड़े वर्गों एवं महिलाओं से संबंधित मुद्दे; सरकारी विकास योजनाएं, जिनमें TSP एवं SCSP शामिल हैं |
गरीबी एवं बेरोजगारी | मापन एवं प्रवृत्तियां; गरीबी रेखा से नीचे (BPL) परिवारों की पहचान; बहुआयामी गरीबी सूचकांक |
खाद्य एवं पोषण सुरक्षा | खाद्य उत्पादन एवं उपभोग; भंडारण, खरीद, वितरण, आयात एवं निर्यात; PDS, ICDS एवं मिड-डे मील; खाद्य एवं पोषण सुरक्षा के लिए सरकारी नीतियां |
नियोजन | पंचवर्षीय योजनाओं के उद्देश्य एवं रणनीतियां; योजना आयोग एवं राष्ट्रीय विकास परिषद (NDC) की भूमिका; विकेंद्रीकृत नियोजन; पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) की भूमिका |
ग्रुप (C) - आर्थिक सुधार, प्रकृति एवं भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव सिलेबस 2026
विषय | सिलेबस |
आर्थिक सुधार | उदारीकरण, निजीकरण एवं वैश्वीकरण (LPG); आर्थिक सुधारों का औचित्य एवं आवश्यकता; भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव |
अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाएं | IMF, विश्व बैंक एवं WTO; भारतीय अर्थव्यवस्था में उनकी भूमिका एवं प्रभाव |
बैंकिंग एवं ग्रामीण ऋण | बैंकिंग क्षेत्र में सुधार; ग्रामीण ऋण के स्रोत एवं समस्याएं; NABARD, RRBs, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक, ग्रामीण सहकारी संस्थाएं, स्वयं सहायता समूह (SHGs), माइक्रोफाइनेंस एवं वित्तीय समावेशन |
वैश्वीकरण | भारत में FDI एवं FII; विभिन्न क्षेत्रों पर वैश्वीकरण के सकारात्मक एवं नकारात्मक प्रभाव |
कृषि सुधार | कृषि क्षेत्र में सुधार एवं आर्थिक विकास पर उनका प्रभाव; सब्सिडी, सार्वजनिक निवेश, सुधार एवं कृषि संकट |
औद्योगिक सुधार | औद्योगिक नीति में बदलाव एवं औद्योगिक विकास पर उनका प्रभाव; लघु एवं मध्यम उद्यमों (SMEs) की समस्याएं; सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की भूमिका; निजीकरण एवं विनिवेश |
ग्रुप (D) - झारखंड की अर्थव्यवस्था: विशेषताएं, मुद्दे, चुनौतियां एवं रणनीतियां सिलेबस 2026
विषय | सिलेबस |
आर्थिक विकास एवं संरचना | झारखंड की अर्थव्यवस्था की संरचना एवं क्षेत्रवार संरचना; राज्य घरेलू उत्पाद (SDP) एवं प्रति व्यक्ति NSDP में वृद्धि; कृषि एवं औद्योगिक विकास |
जनसांख्यिकीय विशेषताएं | जनसंख्या वृद्धि, लिंगानुपात, जनसंख्या घनत्व, साक्षरता, कार्यबल की संरचना एवं ग्रामीण-शहरी संरचना; जनगणना 2011; जिलों के बीच असमानताएं |
गरीबी एवं विकास | गरीबी, बेरोजगारी, खाद्य सुरक्षा, कुपोषण, शिक्षा एवं स्वास्थ्य; प्रमुख सरकारी पहल एवं योजनाएं |
कृषि एवं ग्रामीण विकास | कृषि एवं ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दे; MGNREGA, PMGSY, PURA, भारत निर्माण, SGSY, IAY, NRLM एवं खाद्य सुरक्षा योजनाएं |
भूमि एवं कृषि संबंधी मुद्दे | भूमि सुधार, कृषि संबंध एवं जनजातीय भूमि का अलगाव |
वन एवं पर्यावरण | वन विकास, विकास के कारण होने वाला विस्थापन; वन अधिकार अधिनियम (FRA); पर्यावरणीय क्षरण एवं सरकारी नीतियां |
पंचवर्षीय योजनाएं | 10वीं एवं 11वीं पंचवर्षीय योजनाओं की रणनीतियां एवं उपलब्धियां; जनजातीय उप-योजना (TSP) एवं विकास संबंधी पहल |
झारखंड पीसीएस-जे 2026 परीक्षा का छठा पेपर सामान्य विज्ञान, पर्यावरण एवं प्रौद्योगिकी विकास है। झारखंड उच्च न्यायपालिका परीक्षा के सामान्य विज्ञान सिलेबस को पांच ग्रुप में विभाजित किया गया है। यह पेपर 200 अंकों का है और इसमें वैकल्पिक एवं अनिवार्य दोनों प्रकार के प्रश्न शामिल हैं।
ग्रुप एवं विषय | शामिल विषय |
ग्रुप A – भौतिक विज्ञान | इकाइयों की प्रणाली: MKS, CGS एवं SI। मूलभूत अवधारणाएं: चाल, वेग, गुरुत्वाकर्षण, द्रव्यमान, भार, बल, आघात, कार्य, शक्ति एवं ऊर्जा। सौरमंडल: सूर्य एवं अन्य ग्रहों के संदर्भ में पृथ्वी की स्थिति; पृथ्वी एवं चंद्रमा की गति; चंद्र एवं सूर्य ग्रहण। ध्वनि: ध्वनि की प्रकृति एवं अवधारणा; तरंगदैर्ध्य एवं आवृत्ति; अवश्रव्य एवं पराश्रव्य ध्वनि; अवश्रव्य ध्वनि के प्राकृतिक स्रोत; पराश्रव्य ध्वनि की विशेषताएं एवं उपयोग |
ग्रुप B – जीवन विज्ञान | जीव जगत: कोशिका की संरचना एवं कार्य; जीवों में विविधता। जैव अणु: कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन एवं वसा; विटामिन एवं उनकी कमी से होने वाले रोग; एंजाइम; पादप एवं जंतु हार्मोन तथा उनके कार्य। कोशिका प्रजनन: कोशिका चक्र, समसूत्री विभाजन एवं अर्धसूत्री विभाजन। आनुवंशिकता एवं जेनेटिक्स: मेंडल का वंशागति सिद्धांत; एकसंकर एवं द्विसंकर संकरण; लिंग-सहलग्न वंशागति; लिंग निर्धारण; DNA की संरचना एवं कार्य; DNA प्रतिकृति; प्रोटीन संश्लेषण; जीन विनियमन; विभेदन का आणविक आधार। विकास: पृथ्वी पर जीवन के विकास के सिद्धांत, जिसमें मानव विकास भी शामिल है |
ग्रुप C – कृषि विज्ञान | झारखंड के कृषि-जलवायु क्षेत्र; वर्षा के स्वरूप एवं अजैविक तनाव; वर्षा आधारित कृषि; पारंपरिक खाद्य एवं बागवानी फसलें; जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में खाद्य एवं पोषण सुरक्षा के लिए फसल विविधीकरण; वर्षा जल संचयन एवं कृषि उत्पादन बढ़ाने में इसकी भूमिका; मत्स्य पालन; झारखंड में मृदा उर्वरता; वर्मीकम्पोस्ट एवं फार्म यार्ड मैन्योर (FYM); नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाले बैक्टीरिया एवं उनके उपयोग; जैविक खेती; कृषि वानिकी; बंजर भूमि एवं उसका पुनर्वास; किसानों के लिए सरकारी योजनाएं |
ग्रुप D – पर्यावरण विज्ञान | पारिस्थितिकी तंत्र: अवधारणा, संरचना एवं कार्य; प्राकृतिक संसाधन; नवीकरणीय एवं अनवीकरणीय संसाधन; पर्यावरण संरक्षण; इन-सीटू एवं एक्स-सीटू संरक्षण; जैव विविधता एवं जैव विविधता हॉटस्पॉट; जैव विविधता के लिए खतरे; वायु, जल, ध्वनि एवं मृदा प्रदूषण; ठोस अपशिष्ट प्रबंधन; अम्ल वर्षा; मरुस्थलीकरण; जलवायु परिवर्तन; वैश्विक तापन; ओजोन परत का क्षरण; पर्यावरण संबंधी कानून, जिनमें पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम एवं वन संरक्षण अधिनियम शामिल हैं |
ग्रुप E – विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विकास | राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नीति; पारंपरिक एवं गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोत; ऊर्जा की मांग; परमाणु ऊर्जा, इसके लाभ एवं हानियां; परमाणु नीति; NPT एवं CTBT; भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम; उपग्रहों के अनुप्रयोग; मौसम पूर्वानुमान एवं आपदा चेतावनी; भारतीय मिसाइल कार्यक्रम; रिमोट सेंसिंग; जल, मृदा एवं खनिज संसाधनों के मानचित्रण एवं निगरानी में GIS का उपयोग; कृषि, पशु प्रजनन, औषधि, खाद्य प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण संरक्षण में जैव प्रौद्योगिकी; जैव प्रौद्योगिकी के प्रतिकूल प्रभाव; सूचना प्रौद्योगिकी, कंप्यूटर एवं डेटा प्रोसेसिंग; साइबर अपराध एवं साइबर कानून; राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति; टीबी, कैंसर, एड्स, मलेरिया, कुष्ठ एवं अंधत्व की रोकथाम एवं नियंत्रण के कार्यक्रम |
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने झारखंड न्यायपालिका परीक्षा 2026 के लिए उपरोक्त सिलेबस निर्धारित किया है। अभ्यर्थियों को तैयारी के लिए JPSC द्वारा जारी आधिकारिक झारखंड न्यायपालिका सिलेबस को ही आधार बनाना चाहिए। मुख्य परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को साक्षात्कार (Viva-Voce) के लिए शॉर्टलिस्ट किया जाता है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
झारखंड न्यायिक सेवा परीक्षा की मुख्य परीक्षा में कुल 6 पेपर होते हैं।
प्रारंभिक परीक्षा में सामान्यतः दो वस्तुनिष्ठ प्रकार के पेपर होते हैं, जिनमें सामान्य अध्ययन एवं कानून से संबंधित विषय शामिल होते हैं।
हां। सामान्य हिंदी मुख्य परीक्षा के विषयों में शामिल है।