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    भारत में एलएलबी के बाद जज कैसे बनें?
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    • भारत में एलएलबी के बाद जज कैसे बनें?

    भारत में एलएलबी के बाद जज कैसे बनें?

    Mithilesh KumarUpdated on 16 Oct 2026, 10:54 AM IST
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    भारत में एलएलबी के बाद जज कैसे बनें? : भारत में जज बनना कानून के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित करियर विकल्प है। जो कानून स्नातक देश की न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने और न्याय सुनिश्चित करने की इच्छा रखते हैं, वे इस क्षेत्र में करियर बना सकते हैं। एलएलबी पूरी करने के बाद उम्मीदवार राज्य लोक सेवा आयोगों या न्यायपालिका द्वारा आयोजित प्रतियोगी न्यायिक सेवा परीक्षाओं को पास करके जज बन सकते हैं। इस लेख में एलएलबी के बाद भारत में जज बनने की पूरी प्रक्रिया, पात्रता मानदंड, आवश्यक परीक्षाओं और जरूरी कौशल के बारे में चरणबद्ध जानकारी दी गई है।

    This Story also Contains

    1. जज कौन होता है?
    2. जज की जिम्मेदारियां
    3. एलएलबी के बाद भारत में जज बनने के चरण
    4. हाई कोर्ट जज कैसे बनें?
    5. सुप्रीम कोर्ट जज कैसे बनें?
    6. भारत में जज की सैलरी
    7. जज का करियर ग्रोथ
    8. भारत में जज बनने के लिए जरूरी कौशल
    9. एलएलबी के बाद भारत में जज कैसे बनें
    भारत में एलएलबी के बाद जज कैसे बनें?
    भारत में एलएलबी के बाद जज कैसे बनें

    जज कौन होता है?

    जज एक न्यायिक अधिकारी होता है, जो अदालत की कार्यवाही की निगरानी करता है, मामले से जुड़े दोनों पक्षों की दलीलें सुनता है और प्रस्तुत साक्ष्यों का मूल्यांकन करने के बाद निर्णय सुनाता है। जज निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने, गवाहों के बयान सुनने, आरोपियों को उनके अधिकारों की जानकारी देने और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    एलएलबी के बाद भारत में जज कैसे बनें, इसकी जानकारी होने से इच्छुक कानून स्नातक इस प्रतिष्ठित और जिम्मेदारीपूर्ण करियर के लिए बेहतर तरीके से तैयारी कर सकते हैं।

    जज की जिम्मेदारियां

    अगर आप कानून की डिग्री पूरी करने के बाद जज बनने का विकल्प तलाश रहे हैं, तो जज की जिम्मेदारियों को समझना जरूरी है। जज की प्रमुख जिम्मेदारियां निम्नलिखित हैं:

    • निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करना: सभी पक्षों को अपनी बात रखने का उचित अवसर देना और निष्पक्ष रूप से मामले की सुनवाई करना।

    • दोष या निर्दोष होने का निर्धारण: प्रस्तुत साक्ष्यों और दलीलों के आधार पर यह तय करना कि आरोपी दोषी है या नहीं।

    • सजा निर्धारित करना: दोषी पाए गए व्यक्ति के लिए कानून के प्रावधानों के अनुसार उचित सजा तय करना।

    • दीवानी मामलों में निर्णय देना: दीवानी मामलों में पक्षों की जिम्मेदारी, दायित्व या हर्जाने का निर्धारण करना।

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    एलएलबी के बाद भारत में जज बनने के चरण

    अगर आप एलएलबी के बाद भारत में जज बनने का करियर बनाना चाहते हैं, तो आपको निम्नलिखित महत्वपूर्ण चरणों से गुजरना होगा:

    चरण 1: कानून की डिग्री (LLB) प्राप्त करें

    जज बनने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए कानून की डिग्री प्राप्त करना आवश्यक है। जज बनने के लिए आप निम्नलिखित में से किसी एक मार्ग को चुन सकते हैं:

    • तीन वर्षीय एलएलबी (LLB): स्नातक की डिग्री पूरी करने के बाद तीन वर्षीय एलएलबी पाठ्यक्रम में प्रवेश लें।

    • पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड लॉ कोर्स: 12वीं कक्षा के बाद सीधे पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड लॉ कोर्स, जैसे BA LLB, BBA LLB या B.Com LLB में प्रवेश ले सकते हैं।

    ये भी जाने : 3 वर्षीय एलएलबी बनाम 5 वर्षीय एलएलबी: 3 और 5 वर्षीय एलएलबी पाठ्यक्रमों में अंतर

    चरण 2: न्यायिक सेवा परीक्षा के लिए पात्रता प्राप्त करें

    अधीनस्थ न्यायालयों में जज बनने के लिए उम्मीदवारों को संबंधित राज्य लोक सेवा आयोग या हाई कोर्ट द्वारा आयोजित न्यायिक सेवा परीक्षा (PCS-J) पास करनी होती है। इस परीक्षा के मुख्य रूप से दो स्तर होते हैं:

    1. लोअर ज्यूडिशियल सर्विस (LJS)

    2. हायर ज्यूडिशियल सर्विस (HJS)

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    न्यायिक सेवा परीक्षा सामान्यतः तीन चरणों में आयोजित की जाती है:

    • प्रारंभिक परीक्षा: वस्तुनिष्ठ प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं।

    • मुख्य परीक्षा: विषय आधारित लिखित परीक्षा होती है।

    • वाइवा-वॉयस: व्यक्तिगत साक्षात्कार के माध्यम से उम्मीदवार का मूल्यांकन किया जाता है।

    1. लोअर ज्यूडिशियल सर्विस (LJS)

    लोअर ज्यूडिशियल सर्विस (LJS) परीक्षा निचली न्यायपालिका में सिविल जजों की नियुक्ति के लिए आयोजित की जाती है।

    पात्रता:

    • उम्मीदवार के पास तीन वर्षीय एलएलबी या पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड एलएलबी की डिग्री होनी चाहिए।

    • सभी आवेदकों को Advocates Act, 1961 के तहत अधिवक्ता के रूप में नामांकन के लिए पात्र होना चाहिए।

    आयु सीमा:

    • सामान्यतः 21 से 35 वर्ष। हालांकि, आयु सीमा राज्य के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियमानुसार आयु में छूट दी जाती है।

    चयन प्रक्रिया:

    • प्रारंभिक परीक्षा: वस्तुनिष्ठ प्रकार के प्रश्न

    • मुख्य परीक्षा: विषय आधारित लिखित परीक्षा

    • वाइवा-वॉयस: व्यक्तिगत साक्षात्कार

    पाठ्यक्रम:

    • भारत का संविधान

    • भारतीय दंड संहिता (IPC)

    • सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC)

    • आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC)

    • भारतीय साक्ष्य अधिनियम

    • स्थानीय एवं राज्य से संबंधित कानून

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    2. हायर ज्यूडिशियल सर्विस (HJS)

    हायर ज्यूडिशियल सर्विस (HJS) परीक्षा जिला जजों की नियुक्ति या मौजूदा सिविल जजों की पदोन्नति के लिए आयोजित की जाती है। यह परीक्षा उन उम्मीदवारों के लिए भी महत्वपूर्ण है जो जानना चाहते हैं कि एलएलबी के बाद जज कैसे बन सकते हैं।

    पात्रता:

    • उम्मीदवार के पास अदालत में कम से कम 7 वर्षों का लगातार वकालत का अनुभव होना चाहिए। पात्रता संबंधी नियम राज्य के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।

    • उम्मीदवार को ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (AIBE) की आवश्यक शर्तें पूरी करनी होती हैं।

    आयु सीमा:

    • सामान्यतः उम्मीदवार की आयु कम से कम 35 वर्ष और अधिकतम 45 वर्ष होनी चाहिए। हालांकि, आयु सीमा संबंधित राज्य के नियमों के अनुसार अलग हो सकती है।

    पाठ्यक्रम:

    HJS परीक्षा का पाठ्यक्रम LJS परीक्षा के समान हो सकता है, लेकिन इसमें उन्नत केस लॉ, जजमेंट राइटिंग और कानून के व्यावहारिक अनुप्रयोग जैसे विषयों पर अधिक जोर दिया जा सकता है।

    HJS परीक्षा का लाभ:

    HJS परीक्षा के माध्यम से चयनित उम्मीदवारों को अतिरिक्त जिला जज (Additional District Judge) के पद पर नियुक्ति मिल सकती है। इस पद के साथ अधिक जिम्मेदारियां होती हैं और आगे जज के रूप में पदोन्नति के बेहतर अवसर भी मिल सकते हैं।

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    हाई कोर्ट जज कैसे बनें?

    राज्य स्तर पर हाई कोर्ट को सर्वोच्च न्यायिक संस्था माना जाता है। भारत में वर्तमान में 25 हाई कोर्ट हैं, जो विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मामलों की सुनवाई करते हैं।

    पात्रता

    हाई कोर्ट का जज बनने के लिए उम्मीदवार को निम्नलिखित पात्रता मानदंडों को पूरा करना होता है:

    • उम्मीदवार भारत का नागरिक होना चाहिए।

    • उम्मीदवार के पास LLB या LLM की डिग्री होनी चाहिए।

    • उम्मीदवार ने भारत में किसी न्यायिक पद पर कम से कम 10 वर्षों तक कार्य किया हो, या

    • उम्मीदवार ने किसी हाई कोर्ट में कम से कम 10 वर्षों तक अधिवक्ता के रूप में प्रैक्टिस की हो।

    हाई कोर्ट के जज की नियुक्ति में भारत के राष्ट्रपति की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। राष्ट्रपति, भारत के मुख्य न्यायाधीश और संबंधित राज्य के राज्यपाल से परामर्श के बाद हाई कोर्ट के जज की नियुक्ति करते हैं।

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    सुप्रीम कोर्ट जज कैसे बनें?

    भारत की न्यायपालिका में सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और अधीनस्थ न्यायालय शामिल हैं। नई दिल्ली में स्थित सुप्रीम कोर्ट देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया फैसला भारत के अन्य न्यायालयों के लिए बाध्यकारी होता है।

    कानून की डिग्री के बाद जज बनने की प्रक्रिया को समझने वाले उम्मीदवारों के लिए सुप्रीम कोर्ट के जज बनने की पात्रता जानना भी महत्वपूर्ण है।

    पात्रता

    सुप्रीम कोर्ट का जज बनने के लिए उम्मीदवार को निम्नलिखित में से आवश्यक मानदंड पूरा करना होता है:

    • उम्मीदवार भारत का नागरिक होना चाहिए।

    • उसके पास LLB या LLM की डिग्री होनी चाहिए।

    • उसने कम से कम 5 वर्षों तक किसी हाई कोर्ट के जज के रूप में कार्य किया हो, या

    • उसने किसी हाई कोर्ट में कम से कम 10 वर्षों तक अधिवक्ता के रूप में प्रैक्टिस की हो।

    इसके अलावा, कोई व्यक्ति विशिष्ट विधिवेत्ता (distinguished jurist) होने पर भी सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में नियुक्ति के लिए योग्य हो सकता है। ऐसे मामलों में व्यक्ति की कानूनी विशेषज्ञता और योगदान को ध्यान में रखा जाता है।

    भारतीय न्यायपालिका में जज बनने के अलग-अलग स्तरों की अपनी पात्रता और नियुक्ति प्रक्रिया होती है। इसलिए एलएलबी के बाद जज बनने की योजना बनाने वाले उम्मीदवारों को संबंधित न्यायिक सेवा और संवैधानिक प्रावधानों की नवीनतम जानकारी जरूर देखनी चाहिए।

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    भारत में जज की सैलरी

    भारत में जज का वेतन उनके पद, अनुभव और न्यायालय के स्तर के आधार पर अलग-अलग होता है। विभिन्न न्यायिक पदों के लिए वर्तमान और प्रस्तावित वेतनमान नीचे दिए गए हैं:

    न्यायिक पद

    वर्तमान वेतनमान

    प्रस्तावित वेतनमान

    प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट/जूनियर सिविल जज

    ₹27,700 से ₹47,700

    ₹77,840 से ₹1,36,520

    प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट/जूनियर सिविल जज (सेवा में 5 वर्ष बाद)

    ₹33,090 से ₹45,850

    ₹92,960 से ₹1,36,520

    प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट/जूनियर सिविल जज (पहली करियर प्रोग्रेशन के 5 वर्ष बाद या दूसरी करियर प्रोग्रेशन के दौरान)

    ₹39,530 से ₹54,010

    ₹1,11,000 से ₹1,63,030

    सीनियर सिविल जज

    ₹39,530 से ₹54,010

    ₹1,11,000 से ₹1,63,030

    सीनियर सिविल जज (सेवा में 5 वर्ष बाद)

    ₹43,690 से ₹56,470

    ₹1,22,700 से ₹1,80,200

    सीनियर सिविल जज (पहली करियर प्रोग्रेशन के 5 वर्ष बाद)

    ₹43,690 से ₹56,470

    ₹1,22,700 से ₹1,94,660

    जिला जज

    ₹51,550 से ₹63,070

    ₹1,44,840 से ₹1,94,660

    जिला जज (एंट्री ग्रेड के 5 वर्ष बाद सिलेक्शन ग्रेड)

    ₹57,700 से ₹70,290

    ₹1,63,030 से ₹2,19,090

    जिला जज (सिलेक्शन ग्रेड के 3 वर्ष बाद)

    ₹70,290 से ₹76,450

    ₹1,99,100 से ₹2,24,100

    वेतन स्रोत: सेकंड नेशनल ज्यूडिशियल पे कमीशन रिपोर्ट और Judges Amendment Act, 2018।

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    जज का करियर ग्रोथ

    अगर आप यह जानना चाहते हैं कि “क्या मैं एलएलबी के बाद जज बन सकता हूं?”, तो जज के करियर में आगे बढ़ने की प्रक्रिया को समझना बेहद जरूरी है। भारत में जज के करियर में सामान्यतः निम्नलिखित पदोन्नति क्रम देखने को मिलता है:

    • सिविल जज (जूनियर डिवीजन)

    • सीनियर सिविल जज

    • जिला जज (एंट्री ग्रेड)

    • जिला जज (सिलेक्शन ग्रेड)

    • जिला जज (सुपर टाइम स्केल)

    • हाई कोर्ट जज

    • सुप्रीम कोर्ट जज

    भारत में जज बनने के लिए जरूरी कौशल

    न्यायिक सेवा परीक्षा पास करना और पात्रता मानदंडों को पूरा करना महत्वपूर्ण है। हालांकि, एक मजबूत उम्मीदवार बनने के लिए केवल शैक्षणिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है। एलएलबी के बाद भारत में जज बनने की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों में निम्नलिखित कौशल होने चाहिए:

    • मजबूत विश्लेषणात्मक और तार्किक क्षमता

    • उत्कृष्ट लेखन कौशल

    • कानून की धाराओं और Bare Acts की गहरी समझ

    • नैतिकता, ईमानदारी और निष्पक्षता

    • अदालती कार्यवाही और प्रक्रियाओं की समझ

    एलएलबी के बाद भारत में जज कैसे बनें

    उम्मीद है कि इस लेख से आपको एलएलबी के बाद भारत में जज कैसे बनें से जुड़े सवालों के जवाब मिल गए होंगे। जज के रूप में इस प्रतिष्ठित करियर की शुरुआत करने के लिए सबसे पहले आवश्यक कानून की डिग्री, यानी एलएलबी, पूरी करनी होती है। इसके बाद उम्मीदवार को संबंधित न्यायिक सेवा परीक्षा या अन्य आवश्यक कानूनी परीक्षाओं को पास करना होता है।

    न्यायिक सेवा में सफलता के लिए नियमित तैयारी, कानून की मजबूत समझ, तर्क क्षमता और समर्पण जरूरी है। सही दिशा में मेहनत और निरंतर प्रयास के साथ उम्मीदवार भारत में जज के रूप में अपने करियर की शुरुआत कर सकते हैं।

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