SCSVMV Deemed to be University | Law Admissions 2026
Law at SCSVMV | NAAC 'A' Grade | AICTE, BCI & UGC Aproved | 100% Placement Support | Merit-based Scholarships
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) अखिल भारतीय बार परीक्षा (एआईबीई) का संचालन करती है, जो एक राष्ट्रीय स्तर की लाइसेंसिंग परीक्षा है। यह परीक्षा भारत में वकालत करने के इच्छुक नव-स्नातकों के ज्ञान और व्यावहारिक समझ का मूल्यांकन करती है। भारतीय न्यायालयों में वकालत करने के लिए प्रैक्टिस सर्टिफिकेट (सीओपी) प्राप्त करने हेतु विधि स्नातकों को एआईबीई परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य है।
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उम्मीदवारों की तैयारी में सहायता के लिए, हमने इस लेख में एआईबीई 21 सेट सी प्रश्न पत्र 2026 को आंसर की और विस्तृत समाधानों के साथ शामिल किया है।
Careers360, एआईबीई 21 SET C 2026 के प्रश्न पत्र की आंसर की और विस्तृत समाधान प्रदान करता है। यह परीक्षा की संरचना, प्रश्नों के प्रकार और कठिनाई स्तर को समझने के लिए एक उपयोगी साधन है।
एआईबीई 21 सेट C आंसर की और समाधान |
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AIBE 21 SET C (2026) परीक्षा विश्लेषण
विषय (Subject) | कठिनाई स्तर | प्रश्नों की प्रकृति |
संवैधानिक कानून (Constitutional Law) | आसान–मध्यम | अनुच्छेद, जनहित याचिका (PIL), मूल संरचना सिद्धांत (Basic Structure), अध्यादेश |
आपराधिक कानून (IPC/BNS) | आसान | प्रत्यक्ष प्रावधान-आधारित प्रश्न |
आपराधिक प्रक्रिया (CrPC/BNSS) | आसान | धाराएँ, समय-सीमाएँ, डिफॉल्ट जमानत, भरण-पोषण |
साक्ष्य अधिनियम / भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) | आसान–मध्यम | इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, विधिक उपधारणाएँ (Presumptions), दस्तावेज |
सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) | आसान | विभिन्न आदेशों (Orders) पर आधारित प्रक्रियात्मक प्रश्न |
भारतीय संविदा अधिनियम (Contract Act) | आसान | व्यापार पर प्रतिबंध (Restraint of Trade), जमानत/प्रतिभूति (Suretyship) |
विशिष्ट राहत अधिनियम (Specific Relief Act) | मध्यम | प्रतिस्थापित निष्पादन (Substituted Performance), निषेधाज्ञा (Injunctions) |
कंपनी अधिनियम (Companies Act) | मध्यम | फास्ट-ट्रैक विलय (Fast-Track Merger), क्लास एक्शन |
मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम (Arbitration Act) | आसान | क्षेत्राधिकार, धारा 5, मध्यस्थता का स्थान |
श्रम कानून (Labour Laws) | आसान | औद्योगिक विवाद अधिनियम, न्यूनतम मजदूरी |
पारिवारिक कानून (Family Laws) | आसान | हिंदू दत्तक ग्रहण, ईसाई विवाह, पारसी कानून |
कराधान (Taxation) | आसान | छूट (Exemptions), उपहार (Gifts), कटौतियाँ (Deductions) |
पर्यावरण कानून (Environmental Law) | आसान | अनुच्छेद 253, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम (EPA) के प्रावधान |
व्यावसायिक आचार एवं नैतिकता (Professional Ethics) | आसान | बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) नियम, पेशेवर कदाचार (Misconduct) |
बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Rights) | आसान | कॉपीराइट, पेटेंट |
समग्र विश्लेषण (Overall Analysis)
कठिनाई स्तर: आसान से मध्यम (Easy to Moderate)
अधिकांश प्रश्न: प्रत्यक्ष कानूनी प्रावधानों एवं धाराओं पर आधारित।
महत्वपूर्ण क्षेत्र: संवैधानिक कानून, आपराधिक कानून, कंपनी कानून तथा विशिष्ट राहत अधिनियम।
नई विधियों पर फोकस: भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) से प्रश्न पूछे गए।
व्यावसायिक नैतिकता एवं आईपीआर: अपेक्षाकृत सरल और सीधे प्रश्न।
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प्रश्न 1.
A ने B के साथ ₹50 लाख में 6 माह के भीतर एक कोल्ड स्टोरेज निर्माण का अनुबंध किया। निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद भी B ने अनुबंध का पालन नहीं किया। A ने तुरंत C को ₹60 लाख में निर्माण कार्य पूरा करने के लिए नियुक्त कर दिया और बाद में B के विरुद्ध ₹10 लाख अतिरिक्त खर्च की वसूली हेतु वाद दायर किया। विशिष्ट राहत अधिनियम, 1963 के अंतर्गत कौन-सा कथन सही है?
उत्तर: (D) A अतिरिक्त लागत की वसूली नहीं कर सकता क्योंकि उसने B को पूर्व सूचना नहीं दी।
समाधान:
विशिष्ट राहत अधिनियम, 1963 की धारा 20 (Substituted Performance) के अनुसार, अनुबंध का उल्लंघन करने वाले पक्ष को कम से कम 30 दिनों का लिखित नोटिस देकर अनुबंध पूरा करने का अवसर देना आवश्यक है। यदि नोटिस के बाद भी वह अनुबंध पूरा नहीं करता, तभी पीड़ित पक्ष किसी तीसरे व्यक्ति से कार्य करवाकर उसका खर्च वसूल सकता है।
इस मामले में A ने B को कोई पूर्व सूचना दिए बिना C को नियुक्त कर लिया। इसलिए A, B से अतिरिक्त ₹10 लाख की वसूली करने का अधिकार नहीं रखता।
प्रश्न 2.
कंपनियों अधिनियम, 2013 की धारा 233 "फास्ट ट्रैक मर्जर" (Fast Track Merger) से संबंधित है। इसके अनुमोदन के लिए संबंधित प्राधिकरण तथा सामान्य समयावधि क्या है?
उत्तर: (A) 60–90 दिन, क्षेत्रीय निदेशक (Regional Director)
समाधान:
धारा 233 कुछ विशेष श्रेणी की कंपनियों, जैसे छोटी कंपनियों तथा होल्डिंग-सहायक कंपनियों के लिए सरल विलय प्रक्रिया प्रदान करती है। इस प्रक्रिया में राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) की बजाय क्षेत्रीय निदेशक (Regional Director) द्वारा अनुमोदन दिया जाता है।
आवश्यक वैधानिक अनुपालनों और आपत्तियों के अभाव में यह प्रक्रिया सामान्यतः 60–90 दिनों में पूर्ण हो जाती है।
प्रश्न 3.
रमेश के रोजगार अनुबंध में यह शर्त थी कि वह नौकरी छोड़ने के बाद तीन वर्षों तक भारत में किसी भी प्रतिस्पर्धी सॉफ्टवेयर कंपनी में कार्य नहीं करेगा। इस्तीफा देने के बाद वह एक प्रतिस्पर्धी कंपनी में शामिल हो जाता है। XYZ कंपनी उस प्रतिबंधात्मक शर्त को लागू कराने के लिए मुकदमा दायर करती है। भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 के अंतर्गत कानूनी स्थिति क्या होगी?
उत्तर: (C) शून्य (Void) – क्योंकि यह रोजगार समाप्त होने के बाद वैध व्यवसाय/पेशा करने पर प्रतिबंध लगाती है।
समाधान:
भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 की धारा 27 के अनुसार व्यापार, व्यवसाय या पेशे पर प्रतिबंध लगाने वाले समझौते सामान्यतः शून्य होते हैं, सिवाय कुछ सीमित अपवादों (जैसे goodwill की बिक्री) के।
रोजगार समाप्त होने के बाद किसी कर्मचारी को प्रतिस्पर्धी संस्था में कार्य करने से रोकने वाली शर्त भारत में सामान्यतः लागू नहीं की जा सकती। अतः रमेश के विरुद्ध यह प्रतिबंधात्मक शर्त अमान्य है और XYZ कंपनी इसे लागू नहीं करा सकती।
प्रश्न 4.
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 105 के अंतर्गत पुलिस द्वारा की जाने वाली तलाशी एवं जब्ती (Search and Seizure) प्रक्रिया के लिए अब कौन-सी आवश्यकता अनिवार्य है?
(A) परिसर के निवासी से हस्ताक्षरित लिखित स्वीकारोक्ति प्राप्त करना
(B) तलाशी के दौरान न्यायिक मजिस्ट्रेट की उपस्थिति
(C) कम से कम पाँच स्थानीय निवासियों को स्वतंत्र गवाह के रूप में उपस्थित रखना
(D) संपूर्ण तलाशी एवं जब्ती प्रक्रिया की ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्डिंग करना
उत्तर: (D) संपूर्ण तलाशी एवं जब्ती प्रक्रिया की ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्डिंग करना
समाधान:
BNSS, 2023 की धारा 105 के अंतर्गत तलाशी एवं जब्ती की कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्डिंग अनिवार्य कर दी गई है। इसका उद्देश्य जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और साक्ष्यों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना है।
प्रश्न 5.
उत्तराखंड समान नागरिक संहिता नियम, 2025 (Uniform Civil Code Rules, Uttarakhand, 2025) के अंतर्गत कानूनी उत्तराधिकारी (Legal Heir) घोषित करने के आवेदन को रजिस्ट्रार जनरल के पास कब भेजा जाता है?
(A) आवेदन प्राप्त होने के 30 दिन बाद यदि रजिस्ट्रार कोई कार्रवाई न करे
(B) आवेदन प्राप्त होने के 10 दिन बाद यदि रजिस्ट्रार कोई कार्रवाई न करे
(C) आवेदन प्राप्त होने के 15 दिन बाद यदि रजिस्ट्रार कोई कार्रवाई न करे
(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर: (C) आवेदन प्राप्त होने के 15 दिन बाद यदि रजिस्ट्रार कोई कार्रवाई न करे
समाधान:
उत्तराखंड समान नागरिक संहिता नियम, 2025 के अनुसार यदि रजिस्ट्रार आवेदन प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर कोई कार्रवाई नहीं करता है, तो वह आवेदन आगे की कार्रवाई हेतु रजिस्ट्रार जनरल को भेज दिया जाता है।
प्रश्न 6.
दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC), 1973 की कौन-सी धारा ऐसे पति/पत्नी, बच्चों एवं माता-पिता के भरण-पोषण हेतु त्वरित कानूनी उपाय प्रदान करती है जो स्वयं का पालन-पोषण करने में असमर्थ हैं?
(A) धारा 125
(B) धारा 320
(C) धारा 107
(D) धारा 144
उत्तर: (A) धारा 125
समाधान:
धारा 125 CrPC पत्नी, बच्चों एवं माता-पिता के लिए भरण-पोषण प्राप्त करने का एक त्वरित एवं संक्षिप्त (Summary) उपाय प्रदान करती है। इसका मुख्य उद्देश्य ऐसे आश्रित व्यक्तियों को दरिद्रता और उपेक्षा से बचाना है जो स्वयं अपना भरण-पोषण करने में सक्षम नहीं हैं।
अतः सही उत्तर धारा 125 है।
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On Question asked by student community
Hey there,
No. If you are currently in the 5th semester of a 3-year LL.B., you generally cannot register for AIBE yet.
Under the current BCI rules, a 3-year LL.B. student must be in the final semester (6th semester) and have no backlogs from previous semesters to register for AIBE.
Hello Dear Student,
The All India Bar Examination (AIBE) covers 19 major legal subjects, carrying a high-weightage focus on Constitutional Law (8–12 questions) and Family Law including Hindu and Muslim law (6–8 questions)
You can check, find and access more information here:
Hello Dear Student,
Could you provide more information so that i could help you further!
Hello Venkataharanadh
Please check the link given below for the answer key:
https://law.careers360.com/articles/aibe-answer-key
Hope it helps.
Hello Dear Student,
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Admissions open for B.A. LL.B. (Hons.), B.B.A. LL.B. (Hons.) and LL.B Program (3 Years) | School of Law, MRU ranked No. 1 in Law Schools of Excellence in India by GHRDC (2023)
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